भादवा की तीज और चतुर्थी एक ही दिन! 31 अगस्त को कजरी-सातूड़ी तीज के साथ चतुर्थी व्रत, जानिए पूरा कंफ्यूजन

31 अगस्त 2026 को कजरी यानी सातूड़ी तीज और चतुर्थी व्रत एक ही दिन पड़ रहे हैं। जानिए तीज और चतुर्थी की तारीख, महत्व और इस संयोग का पूरा कारण।

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    भादवा का महीना राजस्थान में त्योहारों की रौनक लेकर आता है। घरों में व्रत-पूजन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं और महिलाओं के बीच तीज के गीतों की चर्चा होने लगती है। लेकिन इस बार 31 अगस्त 2026 की तारीख ने लोगों को थोड़ा उलझा दिया है। वजह है—इसी दिन कजरी यानी सातूड़ी तीज और चतुर्थी व्रत का संयोग।

    कई लोगों के मन में सवाल है कि जब 31 अगस्त को तीज है तो चतुर्थी का व्रत भी इसी दिन कैसे हो सकता है? क्या कैलेंडर में गलती है या फिर पंचांग की गणना कुछ और कहती है?

आइए, आसान भाषा में समझते हैं पूरा मामला।


31 अगस्त को है कजरी यानी सातूड़ी तीज

    राजस्थान में कजरी तीज को कई जगह सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह महिलाओं की आस्था और राजस्थान की लोक परंपराओं से गहराई से जुड़ा पर्व है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और भगवान शिव-पार्वती की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं। तीज के अवसर पर पारंपरिक गीत, झूले, श्रृंगार और विशेष पकवान भी पर्व की रौनक बढ़ाते हैं। 2026 में कजरी/सातूड़ी तीज 31 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी।


इसी दिन चतुर्थी व्रत भी क्यों?

    31 अगस्त की तारीख को लेकर असली कंफ्यूजन यहीं से शुरू होता है। इस दिन पंचांग में बहुला चतुर्थी और हेरंब संकष्टी का भी उल्लेख है। चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित व्रत है। संकष्टी चतुर्थी में गणपति की पूजा के साथ चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए इस बार एक ही अंग्रेजी तारीख पर तीज और चतुर्थी दोनों पर्व सामने आने से लोगों के बीच सवाल उठना स्वाभाविक है।



क्या तीज और चतुर्थी एक ही तिथि हैं?

    नहीं, तीज और चतुर्थी दो अलग-अलग तिथियां हैं। तीज का संबंध तृतीया से और चतुर्थी का संबंध चतुर्थी तिथि से होता है। कंफ्यूजन इसलिए होता है क्योंकि हिंदू पंचांग की तिथियां अंग्रेजी कैलेंडर की तरह रात 12 बजे से शुरू और खत्म नहीं होतीं। तिथि का समय सूर्योदय और खगोलीय गणना के आधार पर बदलता रहता है। इसी कारण कभी-कभी दो अलग तिथियों से जुड़े धार्मिक पर्व एक ही अंग्रेजी तारीख पर आ सकते हैं।

एक ही दिन शिव-पार्वती और गणेश जी की पूजा

    31 अगस्त का दिन धार्मिक दृष्टि से इसलिए भी खास बन जाता है क्योंकि इस दिन कजरी तीज के कारण शिव-पार्वती की आराधना और चतुर्थी के कारण भगवान गणेश की पूजा का अवसर रहेगा। यानी एक ही तारीख पर दो अलग धार्मिक परंपराओं का महत्व देखने को मिलेगा। हालांकि दोनों व्रतों की पूजा-विधि और धार्मिक मान्यताएं अलग हैं, इसलिए दोनों को एक ही व्रत समझना सही नहीं होगा।

कजरी तीज में महिलाओं की आस्था

    कजरी तीज राजस्थान की लोक संस्कृति से जुड़ा ऐसा पर्व है जिसमें धार्मिक आस्था के साथ पारंपरिक रंग भी देखने को मिलता है। महिलाएं इस दिन सज-धजकर पूजा करती हैं, तीज के गीत गाती हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। कई स्थानों पर झूले और सामूहिक तीज उत्सव भी आयोजित किए जाते हैं। वजह है कि राजस्थान में कजरी या सातूड़ी तीज सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि परंपरा और भावनाओं से जुड़ा त्योहार भी है।

चतुर्थी व्रत में क्या है खास?

    चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश की आराधना के लिए रखा जाता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है और भक्त उनसे जीवन में सुख-शांति तथा बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं। संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन का भी विशेष महत्व है। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के अनुसार चंद्रोदय का समय देखना चाहिए।


31 अगस्त को लेकर क्या याद रखें?

अगर आपके मन में भी यह सवाल है कि 31 अगस्त को तीज है या चतुर्थी, तो इसे बहुत आसान तरीके से याद रखें

31 अगस्त 2026 = कजरी/सातूड़ी तीज + चतुर्थी व्रत।

दोनों पर्व एक ही अंग्रेजी तारीख पर हैं, लेकिन दोनों की धार्मिक तिथियां और पूजा की परंपराएं अलग हैं।

यानी कैलेंडर में एक तारीख देखकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह पंचांग की तिथि-गणना के कारण बनने वाला विशेष संयोग है।


व्रत रखने से पहले एक बात जरूर ध्यान दें

    व्रत और पूजा के समय में स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। खासकर संकष्टी चतुर्थी में चंद्रोदय का समय स्थान के हिसाब से बदलता है। इसलिए यदि आप दोनों में से कोई व्रत रख रहे हैं या दोनों की पूजा करना चाहते हैं, तो अपने शहर के पंचांग में दिए गए तिथि, पूजा और चंद्रोदय के समय को जरूर देख लें।

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Comments

  1. क्या इस चौथ का व्रत अपने प्रेमी के लिए करने से पति की उम्र कम हो जाती है या प्रेमी की?

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