- Get link
- X
- Other Apps
सीकर में बनेगा चौधरी चरणसिंह की विरासत का नया केंद्र, जयंत चौधरी बोले—‘प्रतिमा नहीं, विचारों का जीवंत प्रतिबिंब हो स्मारक’
Posted by
Dr. Neeraj Meel
on
- Get link
- X
- Other Apps
सीकर के रामू का बास तिराहे पर प्रस्तावित भारत रत्न चौधरी चरणसिंह स्मारक की 3D परिकल्पना दिल्ली में जयंत चौधरी के सामने प्रस्तुत की गई। जानिए स्मारक से जुड़ी पूरी जानकारी।
***********
सीकर में रामू का बास तिराहे पर प्रस्तावित भारत रत्न चौधरी चरणसिंह की प्रतिमा एवं स्मारक को लेकर भारत रत्न चौधरी चरणसिंह स्मृति संस्थान, सीकर के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान प्रस्तावित स्मारक की पूरी परिकल्पना और उसका 3D मॉडल प्रस्तुत किया।
प्रस्तावित स्मारक को केवल प्रतिमा या पारंपरिक स्मृति स्थल के रूप में नहीं, बल्कि चौधरी चरणसिंह के जीवन, किसान हितों से जुड़े विचारों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक दर्शन और ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाले केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बताई गई।
प्रतिनिधिमंडल की ओर से प्रो. नंदकिशोर मातवा, इंजीनियर हेमाराम रणवा और युवा उद्यमी अनिल धीवां ने स्मारक की डिजाइन, वास्तुशिल्पीय स्वरूप और इसकी वैचारिक पृष्ठभूमि के बारे में श्री जयंत चौधरी को विस्तार से जानकारी दी।
‘स्मारक विचारों और विरासत का जीवंत प्रतिबिंब हो’
प्रस्तावित डिजाइन और अवधारणा को देखने के बाद श्री जयंत चौधरी ने कहा कि चौधरी चरणसिंह का स्मारक सिर्फ एक प्रतिमा या स्मृति स्थल तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसमें उनके ऐतिहासिक जीवन, सिद्धांतों, किसान चेतना और ज्ञान-दृष्टि की झलक दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि चौधरी चरणसिंह का सार्वजनिक जीवन राजनीति से कहीं व्यापक था। उनका चिंतन किसान, गांव, कृषि अर्थव्यवस्था, सामाजिक न्याय, स्वावलंबन और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों से जुड़ा रहा। ऐसे में उनकी स्मृति में बनने वाला केंद्र युवाओं के लिए इतिहास और विचारों को समझने तथा वर्तमान समय में उनसे प्रेरणा लेने का माध्यम बन सकता है।
आधुनिक तकनीक के जरिए सामने आएगा इतिहास
संस्थान के अनुसार, स्मारक को एक आधुनिक ऐतिहासिक एवं ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां चौधरी चरणसिंह के जीवन, संघर्ष, राजनीतिक सफर, किसान आंदोलनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े विचारों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
इसके साथ ही उस सामाजिक और ग्रामीण परिवेश को भी सामने लाने का प्रयास किया जाएगा, जिसने चौधरी चरणसिंह के व्यक्तित्व और उनके चिंतन को आकार दिया।
संस्थान का उद्देश्य केवल अतीत को संरक्षित करना नहीं, बल्कि इतिहास के माध्यम से ज्ञान, विचारों के माध्यम से दिशा और विरासत के जरिए नई पीढ़ी को प्रेरणा देना है।
चौधरी नारायण सिंह और घनश्याम तिवाड़ी से भी हुई बातचीत
बैठक के दौरान श्री जयंत चौधरी ने संस्थान के अध्यक्ष चौधरी नारायण सिंह तथा उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री घनश्याम तिवाड़ी से भी दूरभाष पर बातचीत की। उन्होंने स्मारक की परिकल्पना के लिए संस्थान को शुभकामनाएं दीं और चौधरी चरणसिंह की वैचारिक एवं ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की पहल की सराहना की।
‘धरतीपुत्र चौधरी’ सहित ऐतिहासिक पुस्तकें भेंट
मुलाकात के दौरान संस्थान के मंत्री श्री दयाराम महेरिया ने अपनी पुस्तक ‘धरतीपुत्र चौधरी — चरण सिंह : व्यक्तित्व एवं विचार’ श्री जयंत चौधरी को भेंट की। पुस्तक में चौधरी चरणसिंह के जीवन, संघर्ष, विचारों और किसान हितों के प्रति उनके योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
वहीं, युवा उद्यमी श्री अनिल धीवां ने उन्हें ‘The Jats: Their Origin, Antiquity and Migrations’ पुस्तक भी भेंट की। यह पुस्तक जाट समुदाय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उत्पत्ति, प्राचीनता और विभिन्न क्षेत्रों में हुए प्रवास से जुड़े संदर्भों पर केंद्रित है।
इस मौके पर श्री अनिल धीवां ने कहा कि इतिहास केवल गौरव की विरासत नहीं, बल्कि समाज को समझने और भविष्य की दिशा तय करने का माध्यम भी है। ऐतिहासिक विरासत को प्रमाणिक ज्ञान के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
----------------------------------------------------------------------
“इतिहास से ज्ञान, विचारों से दिशा और किसान चेतना से राष्ट्र निर्माण”
इसी सोच के साथ स्मारक की परिकल्पना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
— भारत रत्न चौधरी चरणसिंह स्मृति संस्थान, सीकर
-----------------------------------------------------------------------
स्मारक को व्यापक वैचारिक केंद्र बनाने की तैयारी
प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्वकर्ता एवं संस्थान के मंत्री श्री दयाराम महेरिया ने कहा कि संस्थान का लक्ष्य चौधरी चरणसिंह की विरासत को सिर्फ एक स्मारक तक सीमित रखना नहीं है। प्रस्तावित केंद्र में उनके इतिहास, किसान दर्शन, ज्ञान, विचार और राष्ट्र निर्माण की दृष्टि को व्यापक रूप से सामने लाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि स्मारक आने वाली पीढ़ियों को यह समझने का अवसर देगा कि चौधरी चरणसिंह ने भारतीय किसान, गांव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को किस नजरिए से देखा और उनके विचार आज के भारत में किस तरह प्रासंगिक हो सकते हैं।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे मौजूद
बैठक में संस्थान के कोषाध्यक्ष प्रभुदयाल ओला, प्रदीप कटारिया, प्रो. सुशीला कुमारी, डॉ. प्रेम लाखरान, नवीन बगड़िया सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
भारत रत्न चौधरी चरणसिंह स्मृति संस्थान, सीकर के अनुसार रामू का बास तिराहे पर प्रस्तावित स्मारक को इतिहास, ज्ञान, विचार और किसान चेतना के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण कदम है।
संस्थान का संकल्प है कि यह स्थल केवल अतीत की स्मृति न बने, बल्कि नई पीढ़ी को इतिहास समझने, विचारों से दिशा लेने और किसान चेतना को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की प्रेरणा भी दे।
#Khabargawah #sikar #SikarNews #RajasthanPolitics, #ChoudharyCharanSingh #jayant choudhary
----------------------------------------------------------------------------------------------------------------
(आप हमें Facebook, X, Instagram, YouTube और Whatsapp पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)
Any Error? Report us
Contents May Subject to copyright
Disclaimer: We cannot guarantee the information is 100% accurate
Comments

Great job but "बुतों से भला नहीं होने वाला, समाज पर ध्यान दो .... समाज के ठेकेदार किसी को मत बनाओ ....जय जाट की
ReplyDeleteचूतिया काम है मूर्तियाँ खड़ा करना
ReplyDelete