हरियाली अमावस्या पर पूजा, स्नान-दान, पितृ तर्पण और पौधरोपण का खास महत्व



हरियाली अमावस्या कब है? जानें पूजा, स्नान-दान, पितृ तर्पण और पौधरोपण का खास महत्व


सावन की बारिश के साथ जब धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है, तब आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। यह पर्व सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति, पितरों और भगवान शिव के प्रति आस्था से भी जुड़ा माना जाता है। इस साल हरियाली अमावस्या 12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।

अमावस्या तिथि 12 अगस्त की रात 1 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगी। इसी वजह से अमावस्या से जुड़े स्नान, दान, पूजा और अन्य धार्मिक कार्य 12 अगस्त को किए जाएंगे। हालांकि पंचांग के समय स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है।

हरियाली अमावस्या क्यों है खास?

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इसी दौरान आने वाली अमावस्या का महत्व भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा, पितरों का स्मरण, तर्पण और दान-पुण्य करने की परंपरा है।

वहीं ‘हरियाली’ नाम इस पर्व को प्रकृति से जोड़ता है। बारिश के मौसम में चारों ओर हरियाली दिखाई देती है, इसलिए इस दिन पौधे लगाने और पर्यावरण की देखभाल करने को भी विशेष महत्व दिया जाता है।

हरियाली अमावस्या पर क्या करें?

इस दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने के बाद भगवान शिव का ध्यान किया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित कर पूजा-अर्चना करें।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार हरियाली अमावस्या पर ये कार्य किए जाते हैं—

भगवान शिव को जल और बेलपत्र अर्पित करें।

‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।

जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।

पितरों का स्मरण कर तर्पण करें।

नदी या किसी पवित्र जल स्रोत में स्नान करने की परंपरा भी कई स्थानों पर है।

पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प लें।

पितरों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है यह दिन

अमावस्या को पारंपरिक रूप से पितरों के स्मरण और तर्पण से जोड़कर देखा जाता है। हरियाली अमावस्या पर भी लोग अपने पूर्वजों को याद कर उनके निमित्त तर्पण और दान करते हैं।

मान्यता है कि श्रद्धा के साथ किए गए ऐसे कर्मों से पितरों की शांति की कामना की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में तर्पण की विधि अलग हो सकती है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार इसे करना उचित माना जाता है।

पौधरोपण से जुड़ा है हरियाली अमावस्या का संदेश

हरियाली अमावस्या की सबसे खूबसूरत परंपराओं में से एक है पेड़-पौधों के प्रति सम्मान। सावन में प्रकृति अपने सबसे हरे रूप में दिखाई देती है और इसी कारण इस पर्व को पर्यावरण से जोड़कर भी देखा जाता है।

अगर इस दिन एक पौधा लगाकर उसे बड़ा होने तक संभालने का संकल्प लिया जाए, तो पर्व का संदेश सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। फलदार, छायादार या स्थानीय जलवायु के अनुकूल पौधा लगाना पर्यावरण के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

हरियाली अमावस्या 2026 पर सूर्य ग्रहण भी, क्या भारत में सूतक लगेगा?

इस बार 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है। उपलब्ध खगोलीय जानकारी के अनुसार ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसी कारण भारतीय क्षेत्र में इसके सूतक को लेकर अलग से चिंता करने की आवश्यकता नहीं बताई गई है।

फिर भी धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर अलग-अलग परंपराएं हो सकती हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार या स्थानीय परंपरा के अनुसार ग्रहण संबंधी नियम मानता है, तो उसी के अनुसार पूजा-पाठ करना बेहतर है।

#Hariyali Amavasya 2026#Hindu Festival, #Religious News #August 2026

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- 

(आप हमें Facebook, X, Instagram, YouTube और Whatsapp पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)


Any Error? Report us

Contents May Subject to copyright 

Disclaimer: We cannot guarantee the information is 100% accurate


Comments