भारत की ‘तीसरी आंख’ बनेगा Hawk’s Eye, ISRO EOS-05 Satellite को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। जानिए Hawk’s Eye यानी भारत की ‘तीसरी आंख’ कहे जा रहे EOS-05 की खासियत, लॉन्चिंग, उपयोग और इससे जुड़ी पूरी जानकारी
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ISRO EOS-05 Satellite: भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब अपने अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-05 को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है। इस मिशन को भारत की अंतरिक्ष आधारित निगरानी क्षमता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
EOS-05 को पहले GISAT-1A के नाम से जाना जाता था। ISRO के मुताबिक यह एक अत्याधुनिक Earth Observation Satellite है, जिसे जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी की निगरानी के लिए तैयार किया गया है।
क्या है EOS-05 और क्यों है खास?
EOS-05 भारत का ऐसा अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की तस्वीरें और जरूरी डेटा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। ISRO के अनुसार यह भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग के लिए तैयार किया गया है।
इसी वजह से इसे कई रिपोर्टों में भारत की ‘तीसरी आंख’ या ‘Hawk’s Eye’ जैसी संज्ञा दी जा रही है। करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से लगातार निगरानी की क्षमता इस मिशन को खास बनाती है।
GSLV-F17 रॉकेट से होगा लॉन्च
EOS-05 को ISRO के GSLV-F17 मिशन के जरिए लॉन्च किया जाना है। ISRO के आधिकारिक मिशन पेज के मुताबिक GSLV-F17, GSLV की 19वीं उड़ान होगी और यह EOS-05 को Sub-Geosynchronous Transfer Orbit में स्थापित करेगा। लॉन्चिंग के लिए श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड लॉन्च पैड का इस्तेमाल किया जाएगा।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार मिशन की लॉन्चिंग 4 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है।
अंतरिक्ष से भारत की लगातार निगरानी
EOS-05 की सबसे बड़ी खासियत इसकी Earth Observation क्षमता है। इस तरह के सैटेलाइट से मिलने वाला डेटा देश में कृषि, जल संसाधन, शहरी नियोजन, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी जैसे कई क्षेत्रों में उपयोगी होता है।
ISRO के Earth Observation कार्यक्रम के तहत भारत पहले से ही कई रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट संचालित कर रहा है, जिनसे कृषि, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, खनिज खोज, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के लिए डेटा मिलता है।
सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में भी मददगार
अंतरिक्ष से मिलने वाली लगातार और विस्तृत तस्वीरें केवल वैज्ञानिक अनुसंधान तक सीमित नहीं रहतीं। इनका इस्तेमाल बाढ़, चक्रवात, जंगलों में आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में भी किया जा सकता है।
इसके अलावा पृथ्वी की सतह पर होने वाले बदलावों पर नजर रखने से रणनीतिक और राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों में भी बेहतर जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है।
ISRO के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?
EOS-05 मिशन ऐसे समय में आ रहा है जब ISRO अपने Earth Observation और अंतरिक्ष आधारित निगरानी नेटवर्क को लगातार मजबूत कर रहा है। इससे पहले भारत ने NISAR जैसे अत्याधुनिक Earth Observation मिशन में भी सफलता हासिल की है। वहीं 12 जनवरी 2026 को PSLV-C62/EOS-N1 मिशन में आई तकनीकी समस्या के बाद EOS-05 मिशन ISRO के लिए एक महत्वपूर्ण अगला कदम माना जा रहा है। ISRO के रिकॉर्ड के मुताबिक PSLV-C62 मिशन में PS3 स्टेज के दौरान विसंगति सामने आई थी।
भारत की ‘तीसरी आंख’ क्यों कहा जा रहा है?
EOS-05 को ‘तीसरी आंख’ कहने की वजह इसकी अंतरिक्ष से पृथ्वी पर नजर रखने की क्षमता है। इसका मकसद देश के बड़े हिस्से की लगातार निगरानी के लिए जरूरी इमेजिंग और डेटा उपलब्ध कराना है।
अगर मिशन योजना के अनुसार सफल रहता है, तो यह भारत की Earth Observation क्षमता को और मजबूत करेगा और अंतरिक्ष से मिलने वाले डेटा के इस्तेमाल को नए स्तर तक ले जाने में मदद कर सकता है।
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