सीकर से टोक्यो तक पहुंची राजस्थान की खनिज ताकत, अनिल धीवा ने जापान में रखा भारत का विजन

 जापान दौरे पर पीयूष गोयल के नेतृत्व वाले भारतीय बिजनेस डेलीगेशन में अनिल धींवा ने राजस्थान की खनिज शक्ति, क्रिटिकल मिनरल्स, आधुनिक तकनीक और ‘लोकल टू ग्लोबल’ पर जोर दिया।

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    भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से 24 से 27 अगस्त 2026 तक जापान के दौरे पर पहुंचे भारतीय उच्चस्तरीय बिजनेस डेलीगेशन में राजस्थान की खनिज और प्राकृतिक पत्थर उद्योग की आवाज भी मजबूती से सामने आई। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में अनिल धींवा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, अल्केमी स्टोन्स मैट्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड ने प्रभावी सहभागिता की। अनिल धींवा फिक्की राजस्थान राज्य खनन उप-समिति के अध्यक्ष और फिक्की राष्ट्रीय खनन समिति के सदस्य के रूप में भारतीय खनन एवं खनिज क्षेत्र की संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत कर रहे हैं।

टोक्यो से नागोया और ओसाका तक आर्थिक साझेदारी पर मंथन

    चार दिवसीय जापान यात्रा के दौरान टोक्यो, नागोया, ओसाका और कोबे में भारतीय और जापानी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ व्यापार, निवेश, आधुनिक विनिर्माण, तकनीक, बाजार पहुंच, क्रिटिकल मिनरल्स और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को लेकर व्यापक चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, स्थानीयकरण, आधुनिक विनिर्माण और वैश्विक बाजारों तक भारतीय उत्पादों की पहुंच जैसे विषयों को प्रमुखता मिली। जापान की ओर से भारत में अगले दशक में 10 ट्रिलियन जापानी येन के निवेश की दिशा में व्यक्त प्रतिबद्धता को दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक विश्वास और दीर्घकालिक औद्योगिक सहयोग की महत्वपूर्ण संभावना के तौर पर देखा जा रहा है।

‘लोकल से ग्लोबल’ बने भारत की नई आर्थिक पहचान

    जापान में हुए संवाद के दौरान भारत की तेजी से बदलती औद्योगिक क्षमता भी चर्चा के केंद्र में रही। उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा, फार्मा, क्रिटिकल मिनरल्स और एडवांस्ड मैटेरियल्स जैसे क्षेत्र भारत की वैश्विक भूमिका को लगातार मजबूत कर रहे हैं।अनिल धींवा ने कहा कि भारत की आर्थिक यात्रा अब केवल घरेलू उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय क्षमता को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    “भारत की आर्थिक यात्रा अब स्थानीय से वैश्विक की यात्रा है। भारत में निर्माण, भारत में नवाचार, भारत में मूल्यवर्धन और भारतीय उत्पादों एवं क्षमताओं को दुनिया तक पहुंचाना हमारी नई आर्थिक दिशा होनी चाहिए।”

    उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों, युवा प्रतिभा और बढ़ती विनिर्माण क्षमता को वैश्विक बाजारों से जोड़ना आने वाले वर्षों की महत्वपूर्ण प्राथमिकता होगी।

क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़ा फोकस

    जापान यात्रा में क्रिटिकल मिनरल्स का विषय भी खास महत्व रखता रहा। इनके अन्वेषण से लेकर आधुनिक खनन तकनीक, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, पुनर्चक्रण और सुरक्षित आपूर्ति शृंखला विकसित करने तक विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। आज क्रिटिकल मिनरल्स सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं। ऐसे में भारत-जापान सहयोग इन खनिजों की विश्वसनीय और विविधीकृत वैश्विक आपूर्ति शृंखला तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

भारत-जापान-अफ्रीका साझेदारी में नई संभावनाएं

    क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भारत, जापान और अफ्रीकी देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं को भी महत्वपूर्ण माना गया। अफ्रीका की विशाल खनिज संपदा, भारत की बढ़ती प्रसंस्करण एवं विनिर्माण क्षमता और जापान की तकनीक, पूंजी तथा औद्योगिक विशेषज्ञता को एक साथ लाकर नई वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं विकसित की जा सकती हैं। फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने भी अफ्रीका में क्रिटिकल मिनरल्स के लिए भारत-जापान के संयुक्त निवेश की संभावनाओं पर जोर दिया है।

राजस्थान की खनिज संपदा को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर

    जापान में राजस्थान की खनिज क्षमता को भी प्रमुखता से सामने रखा गया। अनिल धींवा ने राजस्थान की विशाल खनिज संपदा के साथ ग्रेनाइट, संगमरमर, प्राकृतिक पत्थर, खनन विशेषज्ञता और प्रसंस्करण क्षमता को राज्य की औद्योगिक ताकत का महत्वपूर्ण आधार बताया। जापानी तकनीक और निवेश को राजस्थान की खनिज एवं प्रसंस्करण क्षमता से जोड़कर राज्य में आधुनिक खनन, बेहतर प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और निर्यात के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। विशेष रूप से क्रिटिकल मिनरल्स, अत्याधुनिक खनन तकनीक, प्रसंस्करण और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में राजस्थान भविष्य की वैश्विक औद्योगिक आपूर्ति शृंखलाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जब टोक्यो में गूंजा राजस्थान का घूमर

    जापान यात्रा केवल आर्थिक संवाद तक सीमित नहीं रही। टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में भारतीय बिजनेस डेलीगेशन के स्वागत के दौरान राजस्थान के पारंपरिक घूमर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने भारतीय संस्कृति और राजस्थान की समृद्ध लोक विरासत की झलक जापान में पेश की। वहीं कागोशिमा की पारंपरिक लोक-सांस्कृतिक गीत एवं नृत्य प्रस्तुति ने दोनों देशों की सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर ला दिया। इस सांस्कृतिक संगम ने आर्थिक कूटनीति के साथ सांस्कृतिक कूटनीति और जन-से-जन संपर्क का भी खूबसूरत संदेश दिया।

अनिल धींवा ने इसे भारत-जापान मित्रता का प्रतीक बताते हुए कहा—

    “टोक्यो में राजस्थानी घूमर और कागोशिमा की सांस्कृतिक परंपरा का यह संगम भारत और जापान की मैत्री का अत्यंत सुंदर प्रतीक है। जब व्यापारिक संवाद के साथ संस्कृति संवाद करती है, तब साझेदारी केवल संस्थानों के बीच नहीं रहती, वह लोगों के दिलों तक पहुंचती है।”

    उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारत की सॉफ्ट पावर, राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और भारत-जापान के मजबूत होते जन-से-जन संबंधों की शानदार तस्वीर पेश करता है।

राजस्थान के लिए जापान यात्रा से क्या मायने?

    भारत-जापान के बढ़ते आर्थिक रिश्तों के बीच राजस्थान के लिए खनिज, प्राकृतिक पत्थर, आधुनिक खनन, प्रसंस्करण, तकनीक और निर्यात के क्षेत्र में नए अवसर खुलने की संभावना है। यदि जापानी तकनीक और निवेश को राजस्थान की प्राकृतिक संसाधन क्षमता के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ा जाता है, तो राज्य की खनिज संपदा को केवल कच्चे माल के रूप में नहीं, बल्कि उच्च मूल्यवर्धित वैश्विक उत्पादों के रूप में बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।

    जापान यात्रा से सामने आया संदेश स्पष्ट है—भारत अपनी स्थानीय क्षमताओं को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और राजस्थान अपनी खनिज शक्ति के दम पर इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

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Comments

  1. क्या फ़ायदा हुआ देश को ?

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