सावन की हरियाली से भादवा की तीज तक… हरियाली, कजरी और हरतालिका तीज में क्या फर्क? जानें तीनों की अलग कहानी और परंपरा
सावन और भादवा में आने वाली हरियाली, कजरी और हरतालिका तीज को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, लेकिन तीनों की पूजा और परंपराएं अलग हैं। जानिए सावन की हरियाली तीज से लेकर भादवा की कजरी और हरतालिका तीज तक इन तीनों पर्वों की अलग कहानी, धार्मिक महत्व, व्रत परंपरा और पूजा विधि।
***********************
सावन और भादवा के महीने आते ही तीज के त्योहारों की रौनक बढ़ जाती है। कहीं झूले पड़ते हैं, कहीं मेहंदी रचती है, तो कहीं महिलाएं तीज के लोकगीत गाकर अपनी खुशियां साझा करती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज तीनों अलग-अलग पर्व हैं? तीनों का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से माना जाता है, लेकिन सावन की हरियाली तीज से लेकर भादवा की कजरी और हरतालिका तीज तक, हर पर्व की अपनी अलग तिथि, कथा, पूजा परंपरा और धार्मिक मान्यता है।
आसान भाषा में समझें तो हरियाली तीज सावन की हरियाली और उल्लास का पर्व है, कजरी तीज भादवा के कृष्ण पक्ष में आने वाला व्रत है, जबकि हरतालिका तीज भादवा के शुक्ल पक्ष में माता पार्वती की कठोर तपस्या की याद दिलाती है।
सावन की हरियाली तीज क्या है?
हरियाली तीज सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। सावन में चारों तरफ फैली हरियाली, बारिश और प्रकृति की सुंदरता इस पर्व को खास बनाती है। राजस्थान सहित कई राज्यों में इस दिन महिलाओं के बीच खास उत्साह देखने को मिलता है। हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां पहनना, हाथों पर मेहंदी लगाना, झूले झूलना और तीज के गीत गाना इसकी प्रमुख परंपराओं में शामिल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसलिए सुहागिन महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन और पति की लंबी आयु की कामना से यह व्रत रखती हैं।
याद रखें: हरियाली तीज यानी सावन की हरियाली, झूले और उत्सव।
भादवा की कजरी तीज क्या है?
हरियाली तीज के बाद भादवा मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज आती है। राजस्थान में इसे कई जगह सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। भादवा में बारिश का मौसम अपने अलग रंग में होता है। काले बादल, हरियाली और लोकगीत कजरी तीज के माहौल को खास बनाते हैं। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं। कई स्थानों पर सत्तू से बने पकवान, नीमड़ी माता की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है।
कजरी तीज की पूजा और व्रत खोलने की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकती है।
याद रखें: कजरी तीज यानी भादवा, सत्तू, नीमड़ी माता और चंद्र पूजा।
रक्षाबंधन 2026: 27 या 28 अगस्त? जानिए सही तारीख, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और भद्रा का समय
भादवा की हरतालिका तीज क्या है?
भादवा मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज मनाई जाती है। यह कजरी तीज के बाद आने वाली तीज है और इसे कठिन व्रतों में शामिल किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी सखियां उन्हें एक ऐसे स्थान पर ले गईं जहां उन्होंने शिव की आराधना करते हुए तप किया। इसी कथा से हरतालिका नाम जुड़ा माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और दांपत्य सुख की कामना करती हैं। अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं। कई परंपराओं में इस दिन निर्जला व्रत, शिव-पार्वती की पूजा और रात्रि जागरण किया जाता है।
याद रखें: हरतालिका तीज यानी भादवा की कठोर तपस्या, शिव-पार्वती पूजा और जागरण।
सावन और भादवा की इन तीनों तीजों में क्या अंतर?
हरियाली तीज — सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया
हरियाली, झूले, मेहंदी और सावन के उत्सव से जुड़ी।
कजरी तीज — भादवा के कृष्ण पक्ष की तृतीया
सत्तू, नीमड़ी माता, लोकगीत और चंद्रमा की पूजा इसकी खास पहचान है।
हरतालिका तीज — भादवा के शुक्ल पक्ष की तृतीया
माता पार्वती की तपस्या, शिव-पार्वती की पूजा और निर्जला व्रत से जुड़ी है।
तीनों तीजों की आस्था भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी है, लेकिन सावन की हरियाली से लेकर भादवा की कजरी और हरतालिका तक, हर पर्व अपनी अलग परंपरा और रंग लिए हुए है।
Tags: #Teej2026 #HariyaliTeej #KajariTeej #HartalikaTeej #khabar_gawah
हाल ही में प्रकाशित स्टोरी-
- भादवा की तीज और चतुर्थी एक ही दिन! 31 अगस्त को कजरी-सातूड़ी तीज के साथ चतुर्थी व्रत, जानिए पूरा कंफ्यूजन
- रक्षाबंधन 2026: 27 या 28 अगस्त? जानिए सही तारीख, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और भद्रा का समय
- स्कूल की घंटी के साथ जंक फूड पर भी ब्रेक! राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, गेट से 50 मीटर तक बिक्री बंद
- नगर निकाय चुनाव में साइबर ठगों से रहें सावधान, राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
- सीकर में बनेगा चौधरी चरणसिंह की विरासत का नया केंद्र, जयंत चौधरी बोले—‘प्रतिमा नहीं, विचारों का जीवंत प्रतिबिंब हो स्मारक’
----------------------------------------------------------------------------------------------------------------
(आप हमें Facebook, X, Instagram, YouTube और Whatsapp पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)
Any Error? Report us
Contents May Subject to copyright


Comments
Post a Comment