सीकर के मित्तल अस्पताल पर RGHS की बड़ी कार्रवाई, बड़ा फर्जीवाड़ा आया सामने



सीकर के एस.बी. मित्तल अस्पताल पर RGHS में कथित फर्जी क्लेम का मामला सामने आया है। नौकरी छोड़ चुकी डॉक्टर के नाम से 315 क्लेम किए जाने के बाद अस्पताल निलंबित।

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    राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य योजना RGHS में क्लेम से जुड़ी गंभीर अनियमितता सामने आने के बाद सीकर के एस.बी. मित्तल अस्पताल पर बड़ी कार्रवाई की गई है। RGHS प्रशासन ने अस्पताल को योजना के पैनल से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

    मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि अस्पताल से नौकरी छोड़ चुकी एक महिला डॉक्टर के नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल कथित तौर पर मरीजों के इलाज से जुड़े सैकड़ों क्लेम दाखिल करने में किया गया।

डॉक्टर ने अप्रैल में छोड़ा अस्पताल, जून में सामने आए 315 क्लेम

    जांच के अनुसार, अस्पताल में कार्यरत डॉ. अलका आर्य ने अप्रैल में अपनी नौकरी छोड़ दी थी। इसके बावजूद जून महीने में उनके नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर से 315 मरीजों के उपचार से संबंधित क्लेम RGHS पोर्टल पर दर्ज किए गए।

    अस्पताल से डॉक्टर के जाने और उसके बाद भी उनके नाम से क्लेम दर्ज होने के बीच का अंतर जांच एजेंसियों के लिए अहम बिंदु बना। इसी दौरान डेटा में सामने आई असामान्य गतिविधियों ने पूरे मामले की जांच का रास्ता खोला।

AI और डेटा एनालिसिस से सामने आई संदिग्ध गतिविधि

    RGHS में क्लेम की निगरानी के लिए इस्तेमाल की जा रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिसिस तकनीक ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डिजिटल रिकॉर्ड में असामान्य पैटर्न सामने आने के बाद संबंधित क्लेम की जांच की गई।

    जांच में डॉक्टर के अस्पताल छोड़ने के बाद भी उनके नाम से बड़ी संख्या में क्लेम दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद RGHS प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा।

नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर निलंबन

    मामले को लेकर अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन से कथित अनियमितताओं पर स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।  इसके बाद RGHS प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए एस.बी. मित्तल अस्पताल को योजना के पैनल से निलंबित कर दिया।

    निलंबन का सीधा असर RGHS लाभार्थियों पर पड़ेगा। अब योजना के तहत पात्र मरीज इस अस्पताल में RGHS की कैशलेस उपचार सुविधा का लाभ नहीं उठा पाएंगे, जब तक अस्पताल के संबंध में आगे कोई निर्णय नहीं लिया जाता।

सरकार दो टूक जवाब—फर्जी क्लेम पर कोई समझौता नहीं

    इस कार्रवाई के बाद सरकार ने RGHS में पारदर्शिता और क्लेम प्रक्रिया की निगरानी को लेकर अपना सख्त रुख दोहराया है। प्रमुख शासन सचिव (वित्त) गायत्री राठौड़ के अनुसार, योजना में किसी भी प्रकार की धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    सरकार अब तकनीक के जरिए संदिग्ध क्लेम की पहचान करने और योजना के पैसे के गलत इस्तेमाल को रोकने पर जोर दे रही है। इस मामले में आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।

क्यों अहम है यह मामला?

    RGHS लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा है। ऐसे में किसी अस्पताल द्वारा कथित तौर पर गलत तरीके से क्लेम किए जाने का मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह योजना की निगरानी व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।

    इस पूरे घटनाक्रम में AI आधारित निगरानी ने जिस तरह संदिग्ध क्लेम को चिन्हित किया, वह यह संकेत देता है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य योजनाओं में फर्जी और संदिग्ध बिलों की जांच के लिए तकनीक का इस्तेमाल और बढ़ सकता है।

    फिलहाल अस्पताल के निलंबन के बाद मामले में आगे की जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

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