जयपुर में मरीजों को रेफर करने के नियम सख्त, SMS अस्पताल भेजने से पहले 45 मिनट पहले देनी होगी सूचना

 


बिना इलाज मरीज को एसएमएस रेफर करने पर होगी कार्रवाई मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने रेफरल सिस्टम के लिए बनाई एसओप 

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एसएमएस मेडिकल कॉलेज ने मरीजों की सुविधा के लिए नई एसओपी तैयार की है जिसके तहत अब किसी भी गंभीर मरीज को रेफर करने से पहले उसकी जांच और इलाज का पूरा ब्योरा देना होगा। रेफर करने से 45 मिनट पहले सूचना देना अनिवार्य कर दिया गया है।

जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों के लिए नए नियम लागू किए जा रहे हैं। जनाना, महिला चिकित्सालय, कांवटिया और गणगौरी जैसे अस्पतालों के लिए प्रशासन नई एसओपी बना रहा है। अब इन अस्पतालों से किसी भी गंभीर मरीज को सीधे एसएमएस अस्पताल नहीं भेजा जा सकेगा। रेफर करने से पहले मरीज का प्राथमिक इलाज करना होगा और उसकी सभी जरूरी जांचें पूरी करनी होंगी। इसके साथ ही इलाज का एक पूरा प्रोफार्मा तैयार करना जरूरी होगा ताकि मरीज की स्थिति के बारे में सटीक जानकारी मिल सके।

एसएमएस अस्पताल प्रबंधन को पिछले कुछ समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि अटैच अस्पतालों से बिना किसी पूर्व सूचना के गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में भेज दिया जाता है। हाल ही में जनाना अस्पताल से वेंटिलेटर पर मौजूद एक महिला मरीज को रेफर किया गया था जिसे इमरजेंसी गेट पर समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल सकी। इस घटना के बाद परिजनों ने काफी हंगामा किया था। ऐसे मामलों को रोकने और मरीजों को समय पर इलाज दिलाने के लिए ही यह नया सिस्टम लागू किया जा रहा है।

रेफर करने के नए नियम

नए नियमों के मुताबिक अगर किसी मरीज को एसएमएस रेफर करने की जरूरत पड़ती है तो वहां की इमरजेंसी में कम से कम 45 मिनट पहले सूचना देनी होगी। अस्पताल को यह बताना होगा कि मरीज की स्थिति कैसी है और उसे किस तरह के इलाज की जरूरत है। अगर कोई अस्पताल बिना जांच और प्राथमिक इलाज के मरीज को रेफर करता है तो संबंधित स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर को मरीज की हिस्ट्री और ट्रीटमेंट रिपोर्ट प्रोफार्मा में भरकर साथ भेजनी होगी।


अस्पताल की इमरजेंसी पर बढ़ता बोझ

एसएमएस अस्पताल की इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर पर मरीजों का भारी दबाव रहता है। आंकड़ों के अनुसार 23 से 25 अक्टूबर के बीच रोजाना 900 से ज्यादा मरीज यहां पहुंचे। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया कि रेफरल सिस्टम को सुधारने के लिए मंगलवार को एक विशेष बैठक बुलाई गई है। अब एंबुलेंस में डॉक्टर के साथ ही मरीज को रेफर करना होगा ताकि रास्ते में उसकी स्थिति पर नजर रखी जा सके। इस कदम से मरीजों और उनके परिजनों को होने वाली परेशानी कम होगी।

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