भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नई दिल्ली स्थित भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान में मीडिया एवं संचार अधिकारियों के तृतीय एक-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देशभर के 10 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 200 मीडिया नोडल अधिकारी (एमएनओ), सोशल मीडिया नोडल अधिकारी (एसएमएनओ), जिला मीडिया नोडल अधिकारी एवं राज्य जनसंपर्क विभागों के वरिष्ठ अधिकारी इस सम्मेलन में सम्मिलित हुए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रतिभागियों को सम्मेलन में संबोधित करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग का प्रत्येक कार्य भारत के संविधान, निर्वाचन विधियों एवं समय-समय पर जारी लिखित निर्देशों पर आधारित होता है और इसे पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपादित किया जाता है। उन्होंने अधिकारियों को सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक सूचनाओं एवं गलत आख्यानों के प्रति सतर्क रहने की हिदायत देते हुए कहा कि मीडिया अधिकारियों को ऐसी सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय एवं समयबद्ध ढंग से कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि हाल की विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत इस बात का प्रमाण है कि भारत के मतदाताओं का देश की निर्वाचन प्रणाली में अटूट विश्वास है।
उन्होंने सम्मेलन में जिला जनसंपर्क अधिकारियों (डीपीआरओ) को निर्वाचन आयोग का नया परिवार-सदस्य बताते हुए कहा कि वे समाचारों के आख्यान निर्माण, गलत सूचनाओं के प्रति-उत्तर एवं नागरिकों तक तथ्य-आधारित जानकारी पहुंचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि समय-समय पर निर्वाचन आयोग की साख पर प्रश्न उठाने के अनेक प्रयास हुए हैं, किंतु 25 जनवरी 1950 को अपनी स्थापना के बाद से संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग अपनी स्वतंत्रता, निष्पक्षता एवं संवैधानिक मर्यादा पर अडिग खड़ा है। उल्लेखनीय है कि यह संस्था सात दशकों से भी अधिक समय से विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की चुनावी प्रक्रिया की संरक्षक रही है और इसकी विश्वसनीयता आज भी अटूट है।
निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने प्रतिभागियों से कहा कि आज के डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीपफेक तथा भ्रामक मंशा से तैयार किए गए सिंथेटिक कंटेंट के माध्यम से संस्थाओं के प्रति अविश्वास फैलाने के षड्यंत्रपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने मीडिया एवं संचार अधिकारियों से आग्रह किया कि आयोग के नियमों, निर्देशों एवं दिशा-निर्देशों के आधार पर ऐसे प्रयासों का प्रभावी प्रतिकार किया जाए।
सम्मेलन में ईसीआईनेट (ECINET) एप्लिकेशन की विशेषताओं एवं महत्व की विस्तार से जानकारी दी गई। विश्व का सबसे बड़ा निर्वाचन सेवा प्लेटफॉर्म माने जाने वाले इस एप्लिकेशन में निर्वाचन आयोग के 40 से अधिक पोर्टलों को एकीकृत किया गया है और यह 22 अनुसूचित भाषाओं सहित अंग्रेजी में उपलब्ध है। बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) से लेकर आम मतदाता तक — सभी इस एकल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची खोज, आवेदन की स्थिति जानना, डिजिटल मतदाता पहचान पत्र (ई-ईपीआईसी) डाउनलोड करना तथा शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं। जनवरी 2026 में आधिकारिक लॉन्च के बाद से अब तक इस ऐप के 10 करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं। अब कोई भी नागरिक ईपीआईसी कार्ड में सुधार, नामांकन अथवा नव-निर्माण के लिए किसी कार्यालय के चक्कर लगाए बिना घर बैठे अपने मोबाइल की उंगलियों पर ये सेवाएं प्राप्त कर सकता है — यही इस एप्लिकेशन की सबसे बड़ी उपयोगिता है
इसके साथ ही, सम्मेलन में चुनाव चक्र के विभिन्न चरणों में संचार रणनीतियों, महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधानों तथा मीडिया से जुड़े कानूनों का विस्तृत अवलोकन कराया गया। प्रेस नोट तैयार करने और मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से उनके प्रसार, गलत सूचनाओं से निपटने, युवा मतदाताओं से संवाद तथा निर्वाचन आयोग की पहलों को जन-जन तक पहुंचाने जैसे विषयों पर व्यावहारिक सत्र भी आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को मतदाता सूची तैयार करने, मतदान प्रक्रिया एवं मतगणना प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी कराया गया तथा प्रदर्शनी एवं मीडिया कॉर्नर का भ्रमण कराया गया। सम्मेलन के समापन सत्र में प्रतिभागियों और निर्वाचन आयोग के बीच प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया।
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