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31 जुलाई से पहले सिर्फ ITR भरना काफी नहीं, समय पर वेरिफाई भी करें, वरना रिफंड अटकने के साथ लग सकता है जुर्माना
Posted by
Neeraj Meel
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Image Source : www.thehawk.in
आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तेजी से नजदीक आ रही है। ऐसे में देशभर के करोड़ों टैक्सपेयर्स अपने रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी करने में जुटे हैं। हर साल की तरह इस बार भी अंतिम दिनों में इनकम टैक्स पोर्टल पर भारी संख्या में लोग रिटर्न फाइल करेंगे। लेकिन जल्दबाजी में की गई एक छोटी-सी चूक आपको आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है। दरअसल, कई लोग समय पर ITR तो दाखिल कर देते हैं, लेकिन उसके बाद सबसे जरूरी प्रक्रिया यानी ई-वेरिफिकेशन (सत्यापन) करना भूल जाते हैं। यदि ऐसा हुआ तो आपका रिटर्न अमान्य माना जा सकता है, जिससे टैक्स रिफंड अटक सकता है और आपको जुर्माना व लेट फीस का भी सामना करना पड़ सकता है।
अंतिम दिनों की जल्दबाजी पड़ सकती है भारी
जुलाई का महीना नौकरीपेशा कर्मचारियों, व्यवसायियों और अन्य टैक्सपेयर्स के लिए हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है। आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि नजदीक आते ही पोर्टल पर ट्रैफिक बढ़ जाता है और लोग जल्दबाजी में रिटर्न भरते हैं। ऐसे में कई बार जरूरी दस्तावेजों का मिलान करने या अंतिम प्रक्रिया पूरी करने में लापरवाही हो जाती है।विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम तारीख का इंतजार करने की बजाय समय रहते ITR दाखिल करना और उसे पूरी तरह जांचने के बाद ही सबमिट करना बेहतर होता है।
पहली बार ITR भरने वालों से सबसे ज्यादा होती है यह गलती
पिछले वित्त वर्ष में पहली बार नौकरी शुरू करने वाले लाखों युवाओं के लिए यह पहला अवसर है जब उन्हें आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। अनुभव की कमी और नियमों की जानकारी न होने के कारण कई नए टैक्सपेयर्स यह समझ लेते हैं कि रिटर्न सबमिट होते ही प्रक्रिया पूरी हो गई, जबकि ऐसा नहीं है।ITR दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य होता है। यदि यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती तो आयकर विभाग रिटर्न को अधूरा मान सकता है।
क्यों जरूरी है ITR का ई-वेरिफिकेशन?
आयकर अधिनियम, 1961 के तहत ITR दाखिल करने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर उसका सत्यापन करना आवश्यक है। ई-वेरिफिकेशन इस बात की पुष्टि करता है कि रिटर्न में दी गई सभी जानकारियां करदाता द्वारा सही और सत्य घोषित की गई हैं।दूसरे शब्दों में, ई-वेरिफिकेशन आपके डिजिटल हस्ताक्षर या घोषणा की तरह काम करता है। इसके बिना आयकर विभाग यह नहीं मानता कि रिटर्न आधिकारिक रूप से पूरा हो चुका है।
वेरिफिकेशन नहीं किया तो क्या होगा?
यदि तय समय के भीतर ITR का वेरिफिकेशन नहीं किया जाता है, तो इसके कई नुकसान हो सकते हैं—
- आपका ITR अमान्य (Invalid) माना जा सकता है।
- इनकम टैक्स रिफंड मिलने में देरी हो सकती है या रिफंड अटक सकता है।
- रिटर्न दोबारा दाखिल करने की जरूरत पड़ सकती है।
- नियमानुसार लेट फीस और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
- भविष्य में टैक्स संबंधी अन्य प्रक्रियाओं में भी परेशानी आ सकती है।
ई-वेरिफिकेशन कैसे किया जा सकता है?
आयकर विभाग ने ई-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है। टैक्सपेयर्स नेट बैंकिंग, आधार OTP, बैंक अकाउंट, डीमैट अकाउंट या डिजिटल सिग्नेचर जैसे माध्यमों से कुछ ही मिनटों में अपना ITR वेरिफाई कर सकते हैं। वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ही रिटर्न को वैध माना जाता है।
रिफंड चाहते हैं तो यह कदम बिल्कुल न भूलें
कई टैक्सपेयर्स समय पर रिटर्न भरने के बावजूद केवल ई-वेरिफिकेशन न करने की वजह से महीनों तक अपने टैक्स रिफंड का इंतजार करते रहते हैं। इसलिए यदि आपने ITR दाखिल कर दिया है तो तुरंत अपने खाते में लॉगिन करके यह भी सुनिश्चित करें कि उसका ई-वेरिफिकेशन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
समय रहते पूरी करें प्रक्रिया
31 जुलाई की अंतिम तिथि नजदीक है। ऐसे में अंतिम समय की भीड़ और तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए जल्द से जल्द अपना ITR दाखिल करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि रिटर्न सबमिट करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन भी समय पर हो जाए। यही एक कदम आपके रिफंड को सुरक्षित रखने के साथ-साथ जुर्माने और अनावश्यक परेशानियों से भी बचा सकता है।
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