भारत में आजादी के बाद पहली बार होने जा रही जातिगत जनगणना को लेकर प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जनसंख्या गणना के दूसरे चरण का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और नागरिकों को पहली बार 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन (Self Enumeration) का विकल्प भी मिलेगा।
इन राज्यों से होगी शुरुआत
जनगणना के दूसरे चरण की शुरुआत सबसे पहले लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों से की जाएगी। इन इलाकों में 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना होगी। इसके बाद 1 से 5 अक्टूबर तक संशोधन (रिविजनल राउंड) का कार्य किया जाएगा। इन क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि को संदर्भ तिथि (Reference Date) निर्धारित की गई है। वहीं, देश के अन्य राज्यों में जनसंख्या गणना का मुख्य चरण 2027 में शुरू होने की संभावना है।
पहली बार जुटाए जाएंगे जातिगत आंकड़े
इस जनगणना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आजादी के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर जाति संबंधी आंकड़े भी एकत्र किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे सामाजिक और आर्थिक योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने में मदद मिलेगी।
दो चरणों में पूरी होगी जनगणना
जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न होगी।
पहला चरण – हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसस (HLO):
इसमें मकान की स्थिति, स्वामित्व, पेयजल, बिजली, शौचालय सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की जानकारी दर्ज की जाएगी।
दूसरा चरण – जनसंख्या गणना:
इस चरण में परिवार के प्रत्येक सदस्य से जुड़े लगभग 33 बिंदुओं पर जानकारी एकत्र की जाएगी। इसमें परिवार के मुखिया, सदस्यों की व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा, रोजगार और पहली बार जाति से संबंधित विवरण भी शामिल रहेगा। साथ ही माता-पिता से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
डिजिटल होगी पूरी प्रक्रिया
जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी। गणनाकर्ता मोबाइल एप के जरिए डेटा दर्ज करेंगे, जबकि नागरिक चाहें तो निर्धारित अवधि में ऑनलाइन पोर्टल पर स्वयं भी अपनी जानकारी भर सकेंगे।
11,718 करोड़ रुपये का होगा खर्च
कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2021 से टली जनगणना अब 11,718 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से कराई जाएगी। इसे देश का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक जनगणना अभियान माना जा रहा है। पिछले वर्ष 30 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स (CCPA) की बैठक में जातिगत गणना को जनगणना का हिस्सा बनाने का फैसला लिया गया था।
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