नए कार्यवाहक वाइस चांसलर का आगमन: क्या अपेक्षा की जाए या फिर इंतजार किया जाए?

पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी यूनिवर्सिटी में प्रो. निष्ठा जसवाल ने कार्यवाहक वाइस चांसलर का कार्यभार संभाला। फीस, स्थायी स्टाफ, परीक्षा-परिणाम, छात्र सुविधाओं और समस्याओं को लेकर अब छात्रों की उम्मीदें नई VC से हैं।

**************************** 


        पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी यूनिवर्सिटी में नेतृत्व परिवर्तन के साथ अब छात्रों की निगाहें नई कार्यवाहक वाइस चांसलर प्रो. निष्ठा जसवाल पर टिक गई हैं। निवर्तमान कुलगुरु प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार राय का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद प्रो. निष्ठा जसवाल ने यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलगुरु का अतिरिक्त कार्यभार संभाल लिया है।

        प्रो. निष्ठा जसवाल उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखती हैं। वे डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय की कुलगुरु हैं और इससे पहले हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, शिमला की कुलपति भी रह चुकी हैं। ऐसे में उनके अनुभव से पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों को भी कई उम्मीदें हैं। लेकिन सवाल यह है कि नई कार्यवाहक वाइस चांसलर के आगमन के साथ छात्रों को किन बदलावों की अपेक्षा करनी चाहिए और किन मुद्दों पर अभी इंतजार करना होगा?


स्थायी स्टाफ की कमी से लेकर छात्र सुविधाओं तक सवाल

        यूनिवर्सिटी की व्यवस्थाओं को लेकर छात्रों के बीच कई सवाल लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। इनमें स्थायी स्टाफ की उपलब्धता भी एक प्रमुख मुद्दा है। विद्यार्थियों की अपेक्षा है कि यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज को मजबूत करने के लिए स्थायी स्टाफ की व्यवस्था पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए।

        छात्रों का सवाल यह भी है कि जब यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों से फीस ली जा रही है, तो उसके अनुरूप उन्हें बेहतर सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। प्लेग्राउंड, छात्र सुविधाएं, लाइब्रेरी और अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं को लेकर भी विद्यार्थियों की उम्मीदें हैं।


फीस कम होगी या इंतजार करना होगा?

        उच्च फीस का मुद्दा छात्रों के बीच लगातार चर्चा में रहा है। पूर्व में छात्र संगठनों की ओर से यूनिवर्सिटी के बाहर प्रदर्शन कर फीस कम करने सहित विभिन्न मांगें उठाई गई थीं।

        अब नई कार्यवाहक वाइस चांसलर से छात्रों की अपेक्षा है कि फीस से जुड़े मामलों की समीक्षा की जाए और विद्यार्थियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने की दिशा में कोई रास्ता निकाला जाए। हालांकि, यह भी देखना होगा कि कार्यवाहक कुलगुरु के सीमित कार्यकाल में ऐसे नीतिगत फैसलों पर कितना काम हो पाता है।


परीक्षा और परिणाम व्यवस्था सबसे अहम परीक्षा

        विद्यार्थियों के लिए परीक्षा केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनके भविष्य से जुड़ा विषय है। परीक्षा व्यवस्था, परिणाम में देरी, परिणामों में त्रुटियों और शिकायतों के समाधान को लेकर छात्रों की ओर से समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नई कार्यवाहक वाइस चांसलर के सामने एक बड़ी अपेक्षा यह होगी कि परीक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी हो, परिणाम समय पर जारी हों और किसी विद्यार्थी की समस्या का समाधान बिना अनावश्यक भागदौड़ के हो। परीक्षा व्यवस्था को लेकर लगाए जाने वाले आरोपों की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी व्यवस्था छात्रों का विश्वास मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।


यूनिवर्सिटी के संसाधनों का इस्तेमाल भी सवालों के घेरे में

        किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए संसाधनों का उचित इस्तेमाल महत्वपूर्ण है। यूनिवर्सिटी परिसर में जरूरत नहीं होने के बावजूद बल्ब जलते रहने जैसे छोटे उदाहरण भी संसाधनों के प्रबंधन पर सवाल खड़े करते हैं।

        छात्रों की अपेक्षा है कि बिजली, पानी और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल जिम्मेदारी और जरूरत के अनुसार हो। छोटी-छोटी व्यवस्थाओं में सुधार भी यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही का संदेश दे सकता है।


छात्रों की समस्याएं सुनने के लिए कितना मजबूत होगा सिस्टम?

        किसी भी यूनिवर्सिटी की असली परीक्षा उसके भवनों और सुविधाओं से ज्यादा इस बात से होती है कि वह अपने विद्यार्थियों की समस्याओं को कितनी गंभीरता से सुनती है। छात्रों की अपेक्षा है कि उनकी शिकायतों के लिए प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था हो, शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो और जरूरत पड़ने पर कुलगुरु स्तर पर भी विद्यार्थियों से सीधा संवाद हो।


नई कार्यवाहक वाइस चांसलर से उम्मीद या सिर्फ इंतजार?

        प्रो. निष्ठा जसवाल के पास उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालय प्रशासन का अनुभव है। ऐसे में उनके आगमन को लेकर उम्मीद होना स्वाभाविक है। लेकिन साथ ही यह सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि क्या उनके कार्यवाहक कार्यकाल में छात्रों की प्रमुख समस्याओं पर ठोस पहल दिखाई देगी या इसके लिए स्थायी कुलगुरु की नियुक्ति का इंतजार करना होगा? फीस, स्थायी स्टाफ, परीक्षा और परिणाम, छात्र सुविधाएं, संसाधनों का उचित इस्तेमाल और शिकायतों के समाधान जैसे मुद्दे ऐसे हैं जिनका सीधा संबंध विद्यार्थियों से है। अब गेंद नई कार्यवाहक वाइस चांसलर के पाले में है। छात्र उम्मीद करें, सवाल पूछें या फिर कुछ समय इंतजार करें—इसका जवाब आने वाले दिनों में यूनिवर्सिटी के फैसले देंगे।

    फिलहाल छात्रों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि नेतृत्व परिवर्तन केवल पद और जिम्मेदारी बदलने तक सीमित न रहे, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी यूनिवर्सिटी में व्यवस्थाओं और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर भी इसका असर दिखाई दे।

#Khabar_gawah    #SikarNews    #UniversityNews    #StudentIssues     #StudentVoice     #PDSU

----------------------------------------------------------------------------------------------------------------

(आप हमें Facebook, X, Instagram, YouTube और Whatsapp पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)


Any Error? Report us

Contents May Subject to copyright 

Disclaimer: We cannot guarantee the information is 100% accurate

Comments

  1. लंगड़ी ताई कठि सु आई

    ReplyDelete

Post a Comment