राजस्थान निकाय चुनाव में आचार संहिता लागू होने के बाद क्या बदलेगा? जानिए प्रचार, सरकारी घोषणाओं, रैली, पोस्टर-बैनर और जरूरी सेवाओं से जुड़े नियम।
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राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव का ऐलान होते ही चुनावी माहौल पूरी तरह बदल गया है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ संबंधित नगरीय निकाय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। अब चुनाव तक राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और प्रशासन को चुनावी नियमों के दायरे में काम करना होगा। राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से निकाय चुनाव 2026 को लेकर लगातार तैयारियां और दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
लेकिन आचार संहिता का मतलब सिर्फ नेताओं के लिए नियम नहीं है। इसका असर शहरों में होने वाले विकास कार्यों, सरकारी प्रचार, रैलियों, पोस्टर-बैनर से लेकर सोशल मीडिया तक दिखाई देता है।
नई घोषणा पर ब्रेक, पुराने कामों पर क्या होगा?
आचार संहिता लगने के बाद ऐसे नए विकास कार्यों की घोषणा, शिलान्यास या लोकार्पण पर रोक लग सकती है, जिनसे चुनावी लाभ मिलने की संभावना हो। वहीं, जो काम पहले से स्वीकृत हैं और जिनकी प्रक्रिया आचार संहिता लागू होने से पहले नियमानुसार आगे बढ़ चुकी है, वे स्वतः हर हाल में बंद नहीं होते। उनके संबंध में आयोग और प्रशासन के निर्देश लागू होंगे। यानी आचार संहिता का मतलब यह नहीं कि शहर में विकास का पहिया पूरी तरह रुक जाएगा।
पानी-बिजली-सफाई बंद नहीं होगी
आम लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि रोजमर्रा की आवश्यक सेवाएं चलती रहेंगी। पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट, अस्पताल, कानून-व्यवस्था जैसी जरूरी नागरिक सेवाओं को चुनाव की वजह से बंद नहीं किया जाता। प्रशासन का सामान्य कामकाज भी जारी रहता है।
सरकारी योजनाओं का प्रचार भी आएगा निगरानी के दायरे में
चुनाव के दौरान सरकारी उपलब्धियों या योजनाओं के ऐसे प्रचार पर सवाल उठ सकता है, जिससे किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चुनावी फायदा मिलता हो। यानी सरकारी काम और उसका चुनावी प्रचार—दोनों को अलग रखना होगा।
गाड़ी, लाउडस्पीकर और पोस्टर-बैनर के लिए भी नियम
निकाय चुनाव में प्रचार के दौरान वाहनों, लाउडस्पीकर, पोस्टर और बैनर के इस्तेमाल को लेकर राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसलिए उम्मीदवार अपनी मर्जी से कहीं भी प्रचार वाहन, लाउडस्पीकर या प्रचार सामग्री नहीं लगा सकेंगे।
वोटर को प्रभावित करने की कोशिश पड़ेगी भारी
चुनाव में पैसा, सामान, शराब या किसी दूसरे लालच के जरिए वोट हासिल करने की कोशिश गंभीर मामला बन सकती है। मतदाता को डराना, दबाव बनाना या किसी तरह का अनुचित प्रभाव डालना भी चुनाव की निष्पक्षता के खिलाफ है।
जाति-धर्म के नाम पर प्रचार से बचना होगा
चुनावी प्रचार में ऐसी अपील से बचना होगा, जिससे समाज में धार्मिक, जातीय या सामुदायिक आधार पर विभाजन पैदा हो या मतदाताओं को इस आधार पर प्रभावित किया जाए।
सोशल मीडिया भी अब चुनावी मैदान
फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया गया चुनावी प्रचार भी सावधानी मांगता है।
फर्जी जानकारी, भ्रामक दावे, आपत्तिजनक पोस्ट या विरोधी के खिलाफ गलत सूचना फैलाना उम्मीदवार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।
रैली करनी है तो नियम जानना जरूरी
चुनावी सभा, रैली, जुलूस, लाउडस्पीकर और प्रचार वाहन—इन सबके लिए निर्धारित चुनावी नियमों और अनुमति प्रक्रिया का पालन करना होगा। आचार संहिता लागू होने के बाद “पहले प्रचार कर लेते हैं, अनुमति बाद में देखेंगे” वाला तरीका भारी पड़ सकता है।
तो आखिर आम आदमी पर क्या असर?
अगर आप वोटर हैं तो आपकी रोजमर्रा की जिंदगी सामान्य रूप से चलती रहेगी। बिजली-पानी, सफाई, अस्पताल और दूसरी जरूरी सेवाएं बंद नहीं होंगी। फर्क इतना है कि अब शहर में होने वाली राजनीतिक गतिविधियां और चुनावी प्रचार आयोग की निगरानी में होंगे।
एक लाइन में पूरा मामला
नई चुनावी घोषणा पर ब्रेक, प्रचार पर नियम, सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर निगरानी और वोटर को प्रभावित करने की कोशिश पर सख्ती—लेकिन जरूरी जनसेवाएं जारी रहेंगी। राजस्थान में निकाय चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ अब उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की हर चुनावी गतिविधि पर नजर रहेगी। चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक ही प्रचार और अन्य गतिविधियां संचालित करनी होंगी।
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