त्योहारों से पहले सरकार का बड़ा फैसला, चीनी स्टॉक रखने की सीमा 30 से घटाकर 15 दिन

त्योहारी सीजन से पहले सरकार ने चीनी की स्टॉक लिमिट 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी है। जानिए
 1 सितंबर से लागू होने वाले नए नियम, बढ़ती कीमतों, चीनी की मांग और सप्लाई से जुड़ी पूरी जानकारी। 
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त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों और बाजार में इसकी उपलब्धता को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब एक महीने में 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी का कारोबार या इस्तेमाल करने वाले डीलर अपने पास अधिकतम 15 दिन का स्टॉक ही रख सकेंगे। पहले यह सीमा 30 दिन थी।

नई स्टॉक लिमिट 1 सितंबर से लागू होगी और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। सरकार का मकसद बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है।




त्योहारों में बढ़ जाती है चीनी की मांग

अगस्त से नवंबर के बीच देश में त्योहारों का सिलसिला रहता है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान घरों में चीनी की खपत बढ़ने के साथ-साथ मिठाई, बिस्किट और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियां भी बड़ी मात्रा में चीनी खरीदती हैं।

ऐसे में सरकार को आशंका है कि मांग बढ़ने के साथ अगर थोक कारोबारियों या बड़े खरीदारों के पास जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा हो गया, तो बाजार में सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। इसी को देखते हुए स्टॉक रखने की अवधि आधी कर दी गई है।

एक साल में 13 फीसदी महंगी हुई चीनी

चीनी की कीमतों में तेजी का असर सीधे आम उपभोक्ताओं पर भी दिखाई दे रहा है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 52.30 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। एक साल पहले इसी अवधि में यह कीमत करीब 46.34 रुपये प्रति किलो थी। यानी एक साल में खुदरा कीमत में लगभग 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक महीने में चीनी की कीमतों में करीब 10 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को देश में चीनी की औसत एक्स-मिल कीमत करीब 5,400 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि एक साल पहले यह लगभग 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी।

नई फसल से पहले स्टॉक को लेकर चिंता

चीनी का नया उत्पादन सीजन 1 अक्टूबर से शुरू होने वाला है। लेकिन नए सीजन की शुरुआत में उपलब्ध स्टॉक को लेकर उद्योग में चिंता बनी हुई है। कुछ उद्योग अनुमानों के मुताबिक नए सीजन की शुरुआत में करीब 40 से 42 लाख टन चीनी उपलब्ध हो सकती है। वहीं, कुछ रिसर्चर्स ने शुरुआती स्टॉक का अनुमान इससे भी कम, करीब 32 से 35 लाख टन लगाया है। दूसरी ओर, देश की घरेलू जरूरत करीब 50 लाख टन रहने का अनुमान है।
अगर शुरुआती स्टॉक अनुमान से कम रहा, तो त्योहारी सीजन में मांग और सप्लाई के बीच अंतर बढ़ सकता है। इसका असर कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

कम बारिश ने बढ़ाई गन्ने की फसल की चिंता

चीनी की सप्लाई को लेकर चिंता सिर्फ मौजूदा स्टॉक तक सीमित नहीं है। कुछ गन्ना उत्पादक इलाकों में कम बारिश और सूखे जैसे हालात ने आने वाले सीजन की फसल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि गन्ने की पैदावार प्रभावित होती है, तो अगले चीनी उत्पादन सीजन में कुल उत्पादन पर असर पड़ सकता है। ऐसे में बाजार में सप्लाई बनाए रखना सरकार के लिए अहम चुनौती होगी।

मौजूदा सीजन में कितना है चीनी का स्टॉक?

2025-26 सीजन में देश में कुल चीनी उपलब्धता करीब 320 लाख टन रहने का अनुमान है। घरेलू खपत लगभग 285 लाख टन रहने की संभावना है। इसके अलावा करीब 7 लाख टन चीनी के निर्यात के बाद सीजन के अंत में लगभग 35 लाख टन स्टॉक बचने का अनुमान लगाया गया है। ऐसे समय में जब त्योहारों के कारण खपत बढ़ने वाली है और अगले सीजन की फसल को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है, सरकार का 15 दिन की स्टॉक लिमिट लागू करने का फैसला बाजार में सप्लाई बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

सरकार को उम्मीद है कि स्टॉक की सीमा कम होने से बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर रहेगी, जमाखोरी पर अंकुश लगेगा और त्योहारों के दौरान कीमतों में अनावश्यक तेजी को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

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