हमारी सनातन संस्कृति में आए दिन कोई न कोई त्योहार होता है और 2026 में ऐसा कई बार संयोग बना है कि 22 त्योहार एक ही दिन हुए हैं। कुछ ऐसा ही संयोग 14 सितंबर को भी बन रहा है, क्योंकि इस दिन गणेश चतुर्थी भी है और हरतालिका तीज भी। ऐसे में महिलाओं के मन में असमंजस उत्पन्न होता है कि हरतालिका तीज का व्रत कब किया जाए और गणेश चतुर्थी की पूजा कब की जाए। तो आइए इस शंका का समाधान करते हैं।
जहां एक तरफ महिलाएं हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती से अखंड सुहाग का आशीष मांगती हैं, वहीं गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करके सभी सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
सुबह ही करें हरतालिका तीज की पूजा
पंचांग के अनुसार 14 सितंबर की सुबह 6 बजकर 7 मिनट तक ही तृतीया तिथि रहेगी। अतः तीज का व्रत करने वाली सभी महिलाओं को सूर्योदय के समय ही तीज की पूजा कर लेनी चाहिए। इसके बाद चतुर्थी तिथि लागू हो जाएगी।
ऐसे में एक प्रश्न उठता है कि जो महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखेंगी और जो गणेश चतुर्थी का व्रत रखेंगी, वह दोनों एक साथ कैसे संभव है? क्योंकि हरतालिका तीज एक बहुत ही कठिन व्रत होता है और कई महिलाएं इसे निर्जला रूप से भी करती हैं। ऐसे में यह संभव है कि कोई भी महिला सुबह नहा-धोकर पूजा करते समय तीज और चौथ, दोनों व्रतों का संकल्प ले ले। इस तरह दोनों व्रत एक ही दिन किए जा सकते हैं।
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ऐसे करें दोनों व्रतों की पूजा
दोनों व्रत एक साथ करने के लिए महिलाओं को सुबह जल्दी नहा-धोकर स्वच्छ मन से तीज की पूजा करनी चाहिए और माता पार्वती एवं भगवान शिव से अखंड सुहाग की प्रार्थना करनी चाहिए। इसके पश्चात दिन में गणेश स्थापना की तैयारी करें।
14 सितंबर को गणेश स्थापना के लिए सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इस दौरान घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना करें और उनसे सुख-समृद्धि तथा विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करें।
15 सितंबर को होगा व्रत का पारण
अब सवाल उठता है कि दोनों व्रतों का पारण कब किया जाए? व्रत का पारण 15 सितंबर की सुबह किया जाएगा। क्योंकि हरतालिका तीज का व्रत निर्जला रूप से किया जाता है, हालांकि अलग-अलग जगहों पर इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। ऐसे में यदि आप तीज और चतुर्थी का व्रत एक साथ करते हैं तो 15 सितंबर की सुबह दोनों व्रतों का एक साथ पारण किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: उपरोक्त जो भी जानकारी, पूजा-पाठ की विधि और समय बताया गया है, वह एक सामान्य गणना के आधार पर है। खबर गवाह इसे किसी दावे के रूप में प्रस्तुत नहीं करता है। अतः अपने विवेक और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार निर्णय लें।
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