सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2026 विवाद में 20-25 जुलाई के छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी सभी FIR रद्द कर दी, लेकिन दिल्ली के जंतर-मंतर मामले में 2,873 गंभीर आरोपियों पर कार्रवाई जारी रहेगी। कोर्ट ने मुआवजे नीति बनाने का निर्देश दिया। CJP ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया।
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NEET-UG 2026 से जुड़े विवाद को लेकर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित FIR को रद्द करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन मामलों को आगे न तो जांच के लिए बढ़ाया जाएगा और न ही इन पर अभियोजन की कार्रवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण और bona fide तरीके से प्रदर्शन में शामिल हुए युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।
किन राज्यों के मामलों पर पड़ा फैसला?
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के अलावा दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम से संबंधित FIR को लेकर आवेदन पेश किए गए थे। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार प्रदर्शन से जुड़े मामलों को आगे नहीं बढ़ाने की प्रतिबद्धता जता चुकी है।
इसके बाद कोर्ट ने संबंधित FIR को खत्म करने का आदेश दिया और इसका दायरा देशभर तक बढ़ा दिया। अदालत ने कहा कि यदि 20 से 25 जुलाई के उन्हीं प्रदर्शन से संबंधित कोई अन्य FIR किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज है और वह अदालत के सामने नहीं आई है, तो उसे भी आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और बंद माना जाएगा।
नई FIR दर्ज करने पर भी रोक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि 20 से 25 जुलाई के दौरान हुए उन्हीं प्रदर्शन से जुड़े मामलों में अब कोई नई FIR भी दर्ज नहीं की जाएगी। यानी जिन घटनाओं को लेकर पहले से मामले दर्ज हैं, उन्हें आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और उन्हीं घटनाओं के आधार पर नए मुकदमे दर्ज करने का रास्ता भी बंद कर दिया गया है।
2,873 लोगों को नहीं मिली पूरी राहत
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में एक अहम अपवाद भी है। दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े 2,873 लोगों के मामले में दिल्ली पुलिस को कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी गई है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इन लोगों में गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति भी शामिल हैं।
इसी आधार पर कोर्ट ने इस मामले में नियमित कानूनी प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि प्रदर्शन से जुड़े हर व्यक्ति को बिना किसी अपवाद के कानूनी राहत मिल गई है।
Article 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट का फैसला
तीन सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।
अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए FIR खत्म करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है और इसे सामान्य मामलों में मिसाल के तौर पर नहीं माना जाएगा।
NEET विवाद में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा
सुनवाई के दौरान NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े विवाद के बीच जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का मुद्दा भी सामने आया।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऐसे प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की नीति तैयार की जाएगी। सरकार ने इसके तौर-तरीके तय करने के लिए तीन महीने का समय मांगा। कोर्ट ने मुआवजे से संबंधित नीति तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
CJP ने 5 सितंबर का दिल्ली मार्च लिया वापस
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद Cockroach Janta Party (CJP) ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च वापस लेने की घोषणा कर दी।
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संगठन ने अपना प्रदर्शन वापस लेने का फैसला किया है। प्रस्तावित मार्च का उद्देश्य छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और अन्य मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाना था।
सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत को बताया समाधान का रास्ता
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के सकारात्मक रुख को भी महत्व दिया। कोर्ट की ओर से संकेत दिया गया कि आपसी विश्वास और बातचीत के जरिए विवाद को सुलझाया जा सकता है।
सरकार की ओर से भी अदालत को भरोसा दिलाया गया कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों और मुआवजे से संबंधित पूर्व में दिए गए आश्वासनों को पूरा करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
छात्रों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से 20 से 25 जुलाई के NEET विरोध प्रदर्शनों में शामिल उन छात्रों को बड़ी राहत मिली है, जिनके खिलाफ प्रदर्शन से संबंधित FIR दर्ज की गई थी।
हालांकि गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों से जुड़ा मामला अलग रखा गया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक ओर सामान्य प्रदर्शनकारियों के लिए राहत लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर गंभीर आपराधिक आरोपों वाले मामलों में कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता खुला रखा गया है।
फैसले के बाद अब CJP ने भी 5 सितंबर का प्रस्तावित दिल्ली मार्च वापस ले लिया है। इस घटनाक्रम से NEET विवाद से जुड़े छात्र आंदोलनों में फिलहाल एक नया मोड़ आया है।
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