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Posted by
Dr. Neeraj Meel
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खेती के सीजन में खाद के लिए किसानों को अक्सर दुकानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाद मिल पाएगी या नहीं, इसे लेकर किसान परेशान रहते हैं। किसानों की इसी परेशानी को देखते हुए अब राजस्थान में खाद की बुकिंग और वितरण की व्यवस्था को और आसान बनाने की तैयारी की जा रही है।
सरकार की ओर से समय-समय पर किसानों के लिए नई व्यवस्थाएं शुरू की जाती हैं। इसी कड़ी में कृषि विभाग ने किसान उर्वरक व्यवस्था के पहले चरण के अनुभव और किसानों से मिले सुझावों के आधार पर खाद की बुकिंग का नया प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार किया है।
नई व्यवस्था में किसान मोबाइल फोन, ऐप या सीधे उर्वरक विक्रेता के माध्यम से खाद की बुकिंग कर सकेंगे। इसे घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग की तरह आसान बनाने की तैयारी है।
जमीन और फसल के हिसाब से तय होगी जरूरत
नई व्यवस्था में किसान की जमीन, बोई गई फसल और खाद की वास्तविक जरूरत को आधार बनाया जाएगा। पहले किसान को उपलब्ध खाद और अपनी जरूरत की जानकारी मिलेगी। इसके बाद खाद की बुकिंग की जा सकेगी।
सरकार का लक्ष्य आगे चलकर बुक की गई खाद को किसान के घर तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करना भी है। इसके लिए कृषि विभाग और सहकारिता विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल के अनुसार इसका प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार हो चुका है। मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की दिशा में आगे काम किया जाएगा।
8.31 लाख किसानों ने बनवाए QR कोड
प्रदेश में किसान पहचान संख्या बनाने के लिए 30 सितंबर तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि किसान पहचान संख्या बनने के बाद कृषि योजनाओं और दूसरी सुविधाओं को किसान की वास्तविक जरूरत से जोड़ने में मदद मिलेगी।
अब तक 8.31 लाख किसानों ने QR कोड बनवाए हैं। वहीं करीब 1.20 लाख मीट्रिक टन खाद की खरीद इस व्यवस्था के जरिए की गई है।
पहले चरण में किसान ऐप या ई-मित्र के जरिए खाद बुक कर सकता था। इसके बाद उसे नजदीकी विक्रेता के पास उपलब्ध खाद की जानकारी मिलती थी। किसान विक्रेता के यहां QR कोड दिखाकर निर्धारित दर और मात्रा में खाद ले सकता था। अब इस व्यवस्था में जो दिक्कतें सामने आई हैं, उन्हें दूर करने पर काम किया जा रहा है।
बटाईदार किसानों को भी व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी
नई व्यवस्था को सिर्फ ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड वाले किसानों तक सीमित रखने की तैयारी नहीं है। ऑफलाइन खसरा, बटाईदार किसान, मंदिर माफी भूमि और अन्य विशेष राजस्व रिकॉर्ड वाले मामलों के लिए भी विकल्प तैयार किए जा रहे हैं।
किसान पहचान संख्या के साथ आधार या जनाधार आधारित बुकिंग का सुझाव भी सामने आया है। इसका मतलब यह है कि जो किसान ऐप चलाने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए भी खाद बुक करने का रास्ता रखा जाएगा।
DAP नहीं मिले तो NPK और SSP का विकल्प
आयातित DAP की आपूर्ति प्रभावित होने के बीच सरकार ने दूसरे उर्वरकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है। अब तक 1.74 लाख मीट्रिक टन NPK और 3.76 लाख मीट्रिक टन SSP उपलब्ध कराया गया है।
विभाग के अनुसार प्रदेश में कुल 9.22 लाख मीट्रिक टन फॉस्फेटिक उर्वरक उपलब्ध कराया जा चुका है।
प्रदेश में इतना खाद उपलब्ध
विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में 3.24 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.08 लाख मीट्रिक टन DAP, 95 हजार मीट्रिक टन NPK और 2.15 लाख मीट्रिक टन SSP उपलब्ध है।
अप्रैल से अगस्त तक राजस्थान को 9.28 लाख मीट्रिक टन यूरिया आवंटित हुआ। शुरुआती भंडार सहित अब तक 14.09 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया है। वहीं 4.48 लाख मीट्रिक टन DAP की मांग के मुकाबले अब तक 3.72 लाख मीट्रिक टन DAP उपलब्ध कराया जा चुका है।
किसानों से लिए जा रहे सुझाव
पहले चरण की व्यवस्था में किसानों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ा, इसे लेकर कृषि विभाग किसानों से सीधे संवाद कर रहा है। खाद की बुकिंग से लेकर खाद लेने तक की पूरी प्रक्रिया में कहां दिक्कत आई, इसकी जानकारी ली जा रही है। किसान संगठनों और किसान उत्पादक संगठनों से मिले सुझावों को भी नई व्यवस्था में शामिल किया जा रहा है।
नई व्यवस्था का मकसद यही है कि किसान को खाद के लिए बार-बार दुकानों के चक्कर न लगाने पड़ें और घंटों कतार में खड़े होने की परेशानी कम हो। फिलहाल यह व्यवस्था प्रस्ताव के स्तर पर है। मंजूरी के बाद इसे लागू करने की दिशा में आगे काम किया जाएगा।
Tags: #Khabar_gawah #Farmer #Farmer_Scheme #Agricultural #Rajasthan_news
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